कभी चिंतित थे दिग्गज… अब दोगुनी हुई छोटी कारों की बिक्री! जमकर बिकीं ये गाड़ियां

एक समय चिंता में थीं कंपनियां, अब दोगुनी हुई छोटी कारों की बिक्री! इन मॉडलों ने मचाया बाजार में धमाल

कुछ साल पहले तक ऑटोमोबाइल कंपनियां छोटी कारों के भविष्य को लेकर चिंतित थीं। SUV और बड़ी गाड़ियों की बढ़ती डिमांड के चलते ऐसा लग रहा था कि एंट्री-लेवल और हैचबैक कारें धीरे-धीरे बाजार से गायब हो जाएंगी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। हालिया आंकड़ों और ट्रेंड को देखें तो छोटी कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है और कई कंपनियों के लिए यह सेगमेंट फिर से कमाई का बड़ा जरिया बन गया है।

दरअसल, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और शहरों में ट्रैफिक की समस्या ने लोगों को फिर से छोटी और किफायती कारों की ओर मोड़ दिया है। मध्यम वर्ग और पहली बार कार खरीदने वालों के लिए छोटी कारें अब भी सबसे व्यावहारिक विकल्प बनी हुई हैं। कम कीमत, अच्छा माइलेज और आसान ड्राइविंग के कारण यह सेगमेंट दोबारा मजबूत होता नजर आ रहा है।

ब्रांड / मॉडलसेगमेंटमाइलेज (औसत)शुरुआती कीमत (लगभग)
Maruti Alto K10एंट्री हैचबैक24 kmpl₹4 लाख
Tata Tiagoहैचबैक20 kmpl₹5.5 लाख
Hyundai Grand i10प्रीमियम हैचबैक20 kmpl₹5.9 लाख
Maruti WagonRफैमिली हैचबैक23 kmpl₹5.5 लाख
Renault Kwidबजट कार22 kmpl₹4.7 लाख

क्यों फिर बढ़ी छोटी कारों की मांग
छोटी कारों की बिक्री बढ़ने की सबसे बड़ी वजह उनका बजट-फ्रेंडली होना है। आज भी देश में बड़ी आबादी ऐसी है जो पहली बार कार खरीदने का सपना देखती है। उनके लिए SUV या महंगी सेडान खरीदना आसान नहीं होता। ऐसे में 4 से 6 लाख रुपये की रेंज वाली कारें उनके लिए सही विकल्प बन जाती हैं। इसके अलावा छोटी कारों का मेंटेनेंस खर्च भी कम होता है, जिससे लंबे समय में जेब पर बोझ नहीं पड़ता।

माइलेज बना सबसे बड़ा फैक्टर
महंगे ईंधन के दौर में ग्राहक सबसे पहले माइलेज पर ध्यान देता है। छोटी कारें आमतौर पर 20 kmpl से ज्यादा का माइलेज देती हैं, जो रोजाना ऑफिस या छोटे सफर के लिए बेहद किफायती है। यही वजह है कि ग्राहक अब फिर से इन कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। शहरों में पार्किंग की समस्या को देखते हुए भी छोटी कारें ज्यादा सुविधाजनक मानी जाती हैं।

डिजाइन और फीचर्स में सुधार
पहले छोटी कारों को सिर्फ सस्ती गाड़ी माना जाता था, लेकिन अब इनका लुक और फीचर्स दोनों बदल चुके हैं। नए मॉडल्स में टचस्क्रीन, डिजिटल डिस्प्ले और बेहतर सेफ्टी फीचर्स मिलने लगे हैं। इससे ग्राहक को कम कीमत में भी प्रीमियम अनुभव मिल रहा है। यही बदलाव बिक्री बढ़ने की एक बड़ी वजह बना है।

कंपनियों की रणनीति बदली
Maruti Suzuki, Hyundai और Tata Motors जैसी बड़ी कंपनियों ने फिर से छोटी कारों पर फोकस बढ़ा दिया है। पहले जहां पूरा जोर SUV पर था, वहीं अब बजट कार सेगमेंट के लिए नए अपडेटेड मॉडल पेश किए जा रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि कंपनियां इस सेगमेंट को लेकर अब ज्यादा आत्मविश्वास में हैं।

ग्रामीण और कस्बाई बाजार की भूमिका
छोटी कारों की बिक्री में गांव और छोटे शहरों का योगदान भी काफी बड़ा है। यहां के ग्राहकों को ऐसी कार चाहिए जो मजबूत हो, कम खर्च में चले और खराब सड़कों पर भी आराम से चले। छोटी हैचबैक कारें इन जरूरतों पर पूरी उतरती हैं। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में भी इनकी मांग बढ़ रही है।

पहली कार खरीदने वालों की पसंद
आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो बाइक से सीधे कार पर शिफ्ट करना चाहते हैं। उनके लिए छोटी कार एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन जाती है। कम EMI और आसान फाइनेंस स्कीम के चलते यह कारें ज्यादा लोगों की पहुंच में आ गई हैं। यही वजह है कि एंट्री-लेवल सेगमेंट में बिक्री का ग्राफ ऊपर जा रहा है।

भविष्य में क्या रहेगा ट्रेंड
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में छोटी कारें और ज्यादा एडवांस होंगी। इनमें सेफ्टी फीचर्स और माइलेज दोनों पर जोर दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक और CNG विकल्प भी इस सेगमेंट को और मजबूत बना सकते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि छोटी कारों का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह नए रूप में लौट आया है।

निष्कर्ष
एक समय जिन छोटी कारों को लेकर कंपनियां चिंतित थीं, आज वही उनकी बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बजट, माइलेज और प्रैक्टिकलिटी के कारण यह कारें फिर से लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। बाजार के मौजूदा ट्रेंड को देखें तो यह साफ है कि छोटी कारें आने वाले समय में भी भारतीय ऑटो मार्केट का मजबूत हिस्सा बनी रहेंगी।

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